COPYRIGHT © 2007. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted.

Wednesday, November 14, 2007

स्वर्णिम है वह शब्द

जिन्दगी की
कसोटी पर

घिस कर भी
जो नहीं बदले ,
आपदा मे भी
जिनका कलेवर
ना उतरे
स्वर्णिम है
वह शब्द

2 comments:

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

चूंकि शब्दों के दो प्रकार के मतलब होते हैं अत: वे घिसे या न घिसें हमें उनका उपयोग बहुत संभल कर करना चाहिये. सही उपयोग श्रोता को जीवनदान देगा -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
इस काम के लिये मेरा और आपका योगदान कितना है?

Shastri.jcphilip said...

Thanks ! I checked the site immediatly on receipt
of your email. Some of the poems are familiar -- and
some of them had inspired me to wrte my own
poetic response.